* घर के प्रवेश द्वार {जो आपको अपने घर यानी की चार दीवारी के अन्दर ले जाये} की उंचाई घर के मुखिया की उंचाई से कम से कम 12 और ज्यादा से ज्यादा 18 उंगल ऊँचा होना चाहिए {एक उंगल यानी की आपकी लगभग एक उंगली की मोटाई} । अगर प्रवेश द्वार की उंचाई घर के मुखिया की ऊंचाई से 12 उंगल से कम आ रही है तो घर के मुखिया की सेहत और प्रतिष्ठा पर बुरा असर पड़ता है ।
* कुंडली में पृथ्वी तत्त्व जातक का मजबूत हो तो उसको नीचे के घरों में ही रहना चाहिए , या तो ground floor पर रहे या फिर first floor पे । कुंडली में आप जान सकते हैं की आपका कौनसा तत्त्व प्रधान है , अपनी कुंडली के पहले ही पृष्ठ पर लिखा हुआ होता है की आपका कौनसा तत्त्व है ।
* आकाश तत्त्व बुद्धि से जुड़ा हुआ काम ज्यादा करवाता है , अगर आप ज्यादा सोचते है , लिखते है , पढ़कर ही किसी काम को करते है तो उपरी मंजिलो में रहना ज्यादा लाभकारी है । बहुत सोच विचार करने वाले लोगो को बंद स्थान में नहीं रहना चाहिए ।
* ऐसे कमरों में बिलकुल न रहे जहा सूर्य का प्रकाश न आता हो , अन्यथा उन कमरों में रहने वाले लोगो की कार्य करने की क्षमता कम होती चली जाती है , खासतौर पर विद्यार्थियों को । ऐसे कमरों में रहना चाहिए जहा हवा का संचार अच्छा हो और सूर्य का प्रकाश आता हो ।
* जो लोग चिडचिडे स्वभाव के होते है , जिन्हें गुस्सा ज्यादा आता है उन्हें घर के उत्तर में ही सोना चाहिए । यानी की उत्तर दिशा में जो कमरा होता है गुस्सैल लोगो को वह सोना चाहिए , और उनका बिस्तर ऐसा होना चाहिए की सोने वाले के पैर उत्तर दिशा की ओर हो और सिर दक्षिण की तरफ हो । साथ में यह कमर ऐसा भी होना चाहिए की ताज़ी हवा आये और साथ में दिन में सूर्य का भी प्रकाश आये तो क्रोध धीरे धीरे कम होता जाता है ।
* अगर घर में कमरों की उंचाई 8 , 9 या 10 फीट के करीब होता है , तो घर में रहने वाले लोगो का गुस्सा बढ़ता है , ऐसे घरों में सांस , पेट की समस्या बढ़ती है , इसीलिए घर की छत ज्यादा नीचे नहीं होनी चाहिए ।
* कमरे में अगर खिड़की है तो एक घंटे ही सही , उसे खोलकर रखें , जिससे घर में ताज़ी हवा आ-जा सके ।
* ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगो के कमरे में तेज़ हरा , तेज़ पीला या तेज़ लाल रंग बिलकुल भी नहीं करना चाहिए , ऐसे व्यक्ति के कमरे में चमकीले और रेशमी कपडे भी नहीं होने चाहिए चाहे वो परदे हो या फिर चादर ।
* जो लोग चिंताग्रस्त हो , तनाव से भरे हुए हो , और इसक कारण आलसी होकर कोई भी कार्य नहीं कर पा रहे , तो ऐसे लोगो के कमरे में सूती कपडे , सूती परदे और सूती चादरों का इस्तेमाल ज्यादा करे , इनके रंग होने चाहिए या तो आसमानी नीला , सफ़ेद या फिर हल्का गुलाबी , इसके अतिरिक्त कोई और रंग न इस्तेमाल करे । इस प्रकार के लोगो के कमरे में लौहे का सामान न के बराबर होना चाहिए , शीशे या लकड़ी का सामान हो सकता है तो ज्यादा अच्छा ।
* जिन लोगो को क्रोध आता है , और उसके कारण ब्लड प्रेशर , तनाव , डिप्रेशन से घिरे हुए रहते हे , थके थके हुए रहते है , जिनको उत्साह नहीं है अपने जीवन के प्रति , ह्रदय या फिर सरदर्द की समस्या सताती रहती है , तो ऐसे लोगो को घर में उत्तर की और ही रहना चाहिए , सोते समय सिर दक्षिण की ओर , अँधेरे न हो कमरा , सूर्य का प्रकाश जरुर आना चाहिए । ऐसे लोगों के कमरे में दक्षिण-पूर्व की सिह में एक ऐसा स्थान जरुर होना चाहिए जहा रात के 8 से 11 बजे के बीच दीपक जलाया जा सके और उसके सामने बैठकर ध्यान कर सके । यह ध्यान रखें की वहा कोई भी भगवान् की चित्र नहीं हो , साथ छोटा सा हवन कुण्ड भी रख ले ही आसानी से पूजा की सामग्री वाली दुकानों पर मिल जाता है , इस छोटे से हवन कुण्ड में आपको सुबह और शाम गुग्गल को कपूर के साथ मिलकर जलानी है । इस उपाय से तनाव , सरदर्द , मानसिक चिंताए , क्रोध कम होता चला जायेगा , आप अपने अन्दर एक उत्साह महसूस करेंगे जीवन को लेकर , व्यवहार में अच्छा बदलाव भी आना शुरू हो जायेगा और काम से भी जी भी नहीं चुरा पाएंगे । साथ में जिन लोगो को ब्लड प्रेशर से सम्भंदित बीमारियाँ रहती है उनको यह उपाय जरुर करना चाहिए ।
* सिरहाने पर ऊँची चीजें या फिर खुद सिरहाना ज्यादा ऊँचा नहीं होना चाहिए , सिरहाने अगर अलमारी या कुछ भारी सामान है तो नींद अच्छी नहीं आयेगी जिससे मन अशांत रहना स्वाभाविक है ।
* जिन लोगो का मन अशांत रहता है , गुस्सा और ब्लड प्रेशर रहता हो उनके सिरहाने एक कलश पानी हर रात सिरहाने के पास रखना चाहिए । कलश में पानी के साथ उसमें नारियल भी रख सकते है ।
* सोने के कमरे में चमड़े के जूते-चप्पल बिलकुल नहीं रखने चाहिए । वैसे तो बहार पहनने वाले जूते और चप्पल घर से बहार ही रहने चाहिए और घर के जूते चप्पलों का ही घर में प्रयोग करना चाहिए । पर यह हर समय नहीं हो पाता इसीलिए कम से कम चमड़े के जूते चप्पलो को सोने वाले कमरे से बहार ही रखिए । रसोई घर में कोई भी जूते या चप्पल नहीं जाना चाहिए ।
* जिस घर में चिंता और कलह का माहौल रहता है उस घर में बहुत सारे तुलसी जी के पौधे होने चाहिए । और उनको जहा घर के लोग जिस कमरे में रहते है वह रखने चाहिए : जैसे की आप घर में 7 से 8 तुलसी जी के पौधे ले आये {रामा या श्यामा तुलसी के } , उन्हें थोड़ी देर बाहर रखें , फिर कमरे के अंदर ले आये , क्यूंकि अगर सारा समय कमरे के अन्दर ही तुलसी रखेंगे तो वह ज्यादा नहीं चल पाएंगी , इसीलिए हफ्ते के सात दिनों के अनुसार सात तुलसी ले आये , और हर दिन अलग अलग तुलसी अपने खुद के कमरे में रखें , और अगले दिन वह तुलसी बहार रख आये और उसकी जगह दूसरी तुलसी कमरे में ले आये । बहुत अदभुत लाभ मिलता है बीमारियों में , वातावरण में से कीटाणु ख़तम करती हैं तुलसी जी , और अगर कमरे में अपने सिरहाने रखा जाए तो बहुत ही अच्छा होगा । यह उपाय सूर्य और मंगल के कारण होनी वाली स्वस्थ्य की समस्या को ख़त्म कर देता है ।
* घर के अंदर जब भी तुलसी लगायें तो दोनों प्रकार की तुलसी लगाये , रामा और श्यामा दोनों ।
* जब भी घर बनवाएं , तो जिस व्यक्ति का वह घर है उसकी राशि के अनुसार महूर्त वगेरह निकलवाएँ । राशि के अनुसार अनुकूल समय में बनाया हुआ घर हमेशा सुख शान्ति देने वाला होगा उन लोगो के लिए जो उसमें रहेंगे । वैसे तो ज्यादातर लोग अच्छे दिनों में ही कार्य शुरू करवाते है परन्तु उस घर के मालिक की कुंडली के अनुसार काम शुरू करवाएंगे तो और भी अच्छा फल देने वाला होगा घर ।
* जो लोग फ्लैट खरीदते है , वह अपनी कुंडली के अनुसार ही समय में खरीदें , अपनी कुंडली के अनुसार ही उसकी सफाई और साज-सज्जा करे ।
* टायलेट होने की सही दिशा है दक्षिण से दक्षिण -पश्चिम के बीच या दक्षिण-पश्चिम से पश्चिम के बीच । यह बात का ध्यान रखें की टायलेट मुह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर नहीं होना चाहिए , इसीलिए बाथरूम में कमोट ऐसे लगवाए की आप जब कमोट पर बैठे तो आपका मुह उत्तर या पूर्व दिशा में न हो । जिन लोगो का कमोट ऐसे लगा हुआ होता है जिसपर बैठकर उनका मुह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होता है तो उन लोगो को हमेशा पेट और कमर की बीमारियाँ लगी रहेंगे । जो लोग किराए के घर पे रहते है और कमोट नहीं बदलवा सकते तो कम से कम अपना मुह इन दिशा की ओर न करे , थोडा पलट कर बैठ जाए और अपना मुंह या तो पश्चिम की या तो दक्षिण की ओर कर ले , यह उपाय करने से आप अपने आपको पेट और कमर की बीमारियों से बचा लेंगे ।
* अगर टायलेट सही दिशा में नहीं है तो वह मनीप्लांट लगा दे ।
* पश्चिम से दक्षिण दिशा के बीच में कूड़े का डब्बा रखना चाहिए । या इस दिशा में गंदे पानी निकलने के लिए नाली या रास्ता बनवाना चाहिए ।
* कुंडली में पृथ्वी तत्त्व जातक का मजबूत हो तो उसको नीचे के घरों में ही रहना चाहिए , या तो ground floor पर रहे या फिर first floor पे । कुंडली में आप जान सकते हैं की आपका कौनसा तत्त्व प्रधान है , अपनी कुंडली के पहले ही पृष्ठ पर लिखा हुआ होता है की आपका कौनसा तत्त्व है ।
* आकाश तत्त्व बुद्धि से जुड़ा हुआ काम ज्यादा करवाता है , अगर आप ज्यादा सोचते है , लिखते है , पढ़कर ही किसी काम को करते है तो उपरी मंजिलो में रहना ज्यादा लाभकारी है । बहुत सोच विचार करने वाले लोगो को बंद स्थान में नहीं रहना चाहिए ।
* ऐसे कमरों में बिलकुल न रहे जहा सूर्य का प्रकाश न आता हो , अन्यथा उन कमरों में रहने वाले लोगो की कार्य करने की क्षमता कम होती चली जाती है , खासतौर पर विद्यार्थियों को । ऐसे कमरों में रहना चाहिए जहा हवा का संचार अच्छा हो और सूर्य का प्रकाश आता हो ।
* जो लोग चिडचिडे स्वभाव के होते है , जिन्हें गुस्सा ज्यादा आता है उन्हें घर के उत्तर में ही सोना चाहिए । यानी की उत्तर दिशा में जो कमरा होता है गुस्सैल लोगो को वह सोना चाहिए , और उनका बिस्तर ऐसा होना चाहिए की सोने वाले के पैर उत्तर दिशा की ओर हो और सिर दक्षिण की तरफ हो । साथ में यह कमर ऐसा भी होना चाहिए की ताज़ी हवा आये और साथ में दिन में सूर्य का भी प्रकाश आये तो क्रोध धीरे धीरे कम होता जाता है ।
* अगर घर में कमरों की उंचाई 8 , 9 या 10 फीट के करीब होता है , तो घर में रहने वाले लोगो का गुस्सा बढ़ता है , ऐसे घरों में सांस , पेट की समस्या बढ़ती है , इसीलिए घर की छत ज्यादा नीचे नहीं होनी चाहिए ।
* कमरे में अगर खिड़की है तो एक घंटे ही सही , उसे खोलकर रखें , जिससे घर में ताज़ी हवा आ-जा सके ।
* ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगो के कमरे में तेज़ हरा , तेज़ पीला या तेज़ लाल रंग बिलकुल भी नहीं करना चाहिए , ऐसे व्यक्ति के कमरे में चमकीले और रेशमी कपडे भी नहीं होने चाहिए चाहे वो परदे हो या फिर चादर ।
* जो लोग चिंताग्रस्त हो , तनाव से भरे हुए हो , और इसक कारण आलसी होकर कोई भी कार्य नहीं कर पा रहे , तो ऐसे लोगो के कमरे में सूती कपडे , सूती परदे और सूती चादरों का इस्तेमाल ज्यादा करे , इनके रंग होने चाहिए या तो आसमानी नीला , सफ़ेद या फिर हल्का गुलाबी , इसके अतिरिक्त कोई और रंग न इस्तेमाल करे । इस प्रकार के लोगो के कमरे में लौहे का सामान न के बराबर होना चाहिए , शीशे या लकड़ी का सामान हो सकता है तो ज्यादा अच्छा ।
* जिन लोगो को क्रोध आता है , और उसके कारण ब्लड प्रेशर , तनाव , डिप्रेशन से घिरे हुए रहते हे , थके थके हुए रहते है , जिनको उत्साह नहीं है अपने जीवन के प्रति , ह्रदय या फिर सरदर्द की समस्या सताती रहती है , तो ऐसे लोगो को घर में उत्तर की और ही रहना चाहिए , सोते समय सिर दक्षिण की ओर , अँधेरे न हो कमरा , सूर्य का प्रकाश जरुर आना चाहिए । ऐसे लोगों के कमरे में दक्षिण-पूर्व की सिह में एक ऐसा स्थान जरुर होना चाहिए जहा रात के 8 से 11 बजे के बीच दीपक जलाया जा सके और उसके सामने बैठकर ध्यान कर सके । यह ध्यान रखें की वहा कोई भी भगवान् की चित्र नहीं हो , साथ छोटा सा हवन कुण्ड भी रख ले ही आसानी से पूजा की सामग्री वाली दुकानों पर मिल जाता है , इस छोटे से हवन कुण्ड में आपको सुबह और शाम गुग्गल को कपूर के साथ मिलकर जलानी है । इस उपाय से तनाव , सरदर्द , मानसिक चिंताए , क्रोध कम होता चला जायेगा , आप अपने अन्दर एक उत्साह महसूस करेंगे जीवन को लेकर , व्यवहार में अच्छा बदलाव भी आना शुरू हो जायेगा और काम से भी जी भी नहीं चुरा पाएंगे । साथ में जिन लोगो को ब्लड प्रेशर से सम्भंदित बीमारियाँ रहती है उनको यह उपाय जरुर करना चाहिए ।
* सिरहाने पर ऊँची चीजें या फिर खुद सिरहाना ज्यादा ऊँचा नहीं होना चाहिए , सिरहाने अगर अलमारी या कुछ भारी सामान है तो नींद अच्छी नहीं आयेगी जिससे मन अशांत रहना स्वाभाविक है ।
* जिन लोगो का मन अशांत रहता है , गुस्सा और ब्लड प्रेशर रहता हो उनके सिरहाने एक कलश पानी हर रात सिरहाने के पास रखना चाहिए । कलश में पानी के साथ उसमें नारियल भी रख सकते है ।
* सोने के कमरे में चमड़े के जूते-चप्पल बिलकुल नहीं रखने चाहिए । वैसे तो बहार पहनने वाले जूते और चप्पल घर से बहार ही रहने चाहिए और घर के जूते चप्पलों का ही घर में प्रयोग करना चाहिए । पर यह हर समय नहीं हो पाता इसीलिए कम से कम चमड़े के जूते चप्पलो को सोने वाले कमरे से बहार ही रखिए । रसोई घर में कोई भी जूते या चप्पल नहीं जाना चाहिए ।
* जिस घर में चिंता और कलह का माहौल रहता है उस घर में बहुत सारे तुलसी जी के पौधे होने चाहिए । और उनको जहा घर के लोग जिस कमरे में रहते है वह रखने चाहिए : जैसे की आप घर में 7 से 8 तुलसी जी के पौधे ले आये {रामा या श्यामा तुलसी के } , उन्हें थोड़ी देर बाहर रखें , फिर कमरे के अंदर ले आये , क्यूंकि अगर सारा समय कमरे के अन्दर ही तुलसी रखेंगे तो वह ज्यादा नहीं चल पाएंगी , इसीलिए हफ्ते के सात दिनों के अनुसार सात तुलसी ले आये , और हर दिन अलग अलग तुलसी अपने खुद के कमरे में रखें , और अगले दिन वह तुलसी बहार रख आये और उसकी जगह दूसरी तुलसी कमरे में ले आये । बहुत अदभुत लाभ मिलता है बीमारियों में , वातावरण में से कीटाणु ख़तम करती हैं तुलसी जी , और अगर कमरे में अपने सिरहाने रखा जाए तो बहुत ही अच्छा होगा । यह उपाय सूर्य और मंगल के कारण होनी वाली स्वस्थ्य की समस्या को ख़त्म कर देता है ।
* घर के अंदर जब भी तुलसी लगायें तो दोनों प्रकार की तुलसी लगाये , रामा और श्यामा दोनों ।
* जब भी घर बनवाएं , तो जिस व्यक्ति का वह घर है उसकी राशि के अनुसार महूर्त वगेरह निकलवाएँ । राशि के अनुसार अनुकूल समय में बनाया हुआ घर हमेशा सुख शान्ति देने वाला होगा उन लोगो के लिए जो उसमें रहेंगे । वैसे तो ज्यादातर लोग अच्छे दिनों में ही कार्य शुरू करवाते है परन्तु उस घर के मालिक की कुंडली के अनुसार काम शुरू करवाएंगे तो और भी अच्छा फल देने वाला होगा घर ।
* जो लोग फ्लैट खरीदते है , वह अपनी कुंडली के अनुसार ही समय में खरीदें , अपनी कुंडली के अनुसार ही उसकी सफाई और साज-सज्जा करे ।
* टायलेट होने की सही दिशा है दक्षिण से दक्षिण -पश्चिम के बीच या दक्षिण-पश्चिम से पश्चिम के बीच । यह बात का ध्यान रखें की टायलेट मुह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर नहीं होना चाहिए , इसीलिए बाथरूम में कमोट ऐसे लगवाए की आप जब कमोट पर बैठे तो आपका मुह उत्तर या पूर्व दिशा में न हो । जिन लोगो का कमोट ऐसे लगा हुआ होता है जिसपर बैठकर उनका मुह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होता है तो उन लोगो को हमेशा पेट और कमर की बीमारियाँ लगी रहेंगे । जो लोग किराए के घर पे रहते है और कमोट नहीं बदलवा सकते तो कम से कम अपना मुह इन दिशा की ओर न करे , थोडा पलट कर बैठ जाए और अपना मुंह या तो पश्चिम की या तो दक्षिण की ओर कर ले , यह उपाय करने से आप अपने आपको पेट और कमर की बीमारियों से बचा लेंगे ।
* अगर टायलेट सही दिशा में नहीं है तो वह मनीप्लांट लगा दे ।
* पश्चिम से दक्षिण दिशा के बीच में कूड़े का डब्बा रखना चाहिए । या इस दिशा में गंदे पानी निकलने के लिए नाली या रास्ता बनवाना चाहिए ।
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